मुझे रुकना था

₹399.00

  • By: वासु देसाई
  • ISBN: 9789376868056
  • Price: 399/-
  • Page: 246
  • Size: 6×9
  • Category: FICTION / General
  • Language: Hindi
  • Delivery Time: 07-09 Days

Description

About The Book

हर्ष कटारिया के पास वह सब कुछ था, जिसे दुनिया सफलता कहती है.. करोड़ों का कारोबार, नाम, शोहरत और एक ऐसा भविष्य, जो पहले से तय था। लेकिन जिस जिंदगी को दुनिया उसकी कामयाबी मानती थी, उसी जिंदगी में हर्ष खुद को भीतर से लगातार खोता जा रहा था। एक दिन वह सब कुछ पीछे छोड़कर मुंबई से दूर निकल पड़ता है, बिना किसी तय मंज़िल के, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे लगता है कि अब उसे कहीं रुककर खुद को समझना है।

उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों, कामाख्या की आध्यात्मिकता और प्रकृति की नीरवता के बीच उसकी मुलाकात अन्विका से होती है, एक बेबाक, संवेदनशील और साहसी आर्मी ऑफिसर, जिसकी जिंदगी हर्ष से बिल्कुल अलग है। यह मुलाकात सिर्फ दो अजनबियों की कहानी नहीं बनती; धीरे-धीरे अन्विका हर्ष को उसके भीतर छिपे उस इंसान से मिलाती है, जिसे सफलता की दौड़ में वह कहीं पीछे छोड़ आया था।

लेकिन जिंदगी हर प्रेम कहानी को आसान रास्ता नहीं देती। रिश्तों, जिम्मेदारियों, कर्तव्य, नियति और आत्मबोध के बीच हर्ष को बार-बार एक ही सवाल का सामना करना पड़ता है, आखिर इंसान को सच में चाहिए क्या? दौलत, पहचान और उपलब्धियाँ… या वह एक जगह, एक इंसान और एक उद्देश्य, जहाँ उसका मन सचमुच ठहर सके?

‘मुझे रुकना था’ सिर्फ प्रेम की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की यात्रा है जो दुनिया जीतते-जीतते खुद से हार गया था, और फिर प्रेम, प्रकृति और नियति के रास्ते खुद को दोबारा खोजता है। कभी-कभी जिंदगी हमें वहाँ ले जाती है, जहाँ हमें जाना नहीं होता… क्योंकि वहीं हमें आखिरकार रुकना होता है।

About The Author

वासु देसाई एक लेखक हैं, जिनकी रुचि मानवीय भावनाओं, रिश्तों, आत्मबोध और जीवन के उन अनकहे पहलुओं को शब्द देने में है, जिन्हें अक्सर लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन व्यक्त नहीं कर पाते। उनका लेखन भावनात्मक संवेदनशीलता और जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश करता है।

इतिहास में स्नातक वासु देसाई का झुकाव बचपन से ही पढ़ने, लिखने और अलग-अलग विषयों को गहराई से समझने की ओर रहा है। साहित्य के साथ-साथ उन्हें इतिहास, सिनेमा, मानवीय व्यवहार और बदलती दुनिया को समझने में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक लेखक केवल कल्पना से नहीं, बल्कि अपने आसपास की दुनिया को देखने, सुनने और समझने से भी कहानियाँ रचता है।

उनकी लेखन शैली में भावनात्मक संवाद, सहज भाषा और जीवन से जुड़े प्रश्न प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। वे ऐसी कहानियाँ लिखना पसंद करते हैं जिनमें मनोरंजन के साथ-साथ पाठक को अपने जीवन, रिश्तों और फैसलों के बारे में सोचने का अवसर भी मिले।

‘मुझे रुकना था’ इसी दृष्टिकोण का एक उदाहरण है, एक ऐसी कहानी, जिसमें प्रेम, रिश्ते, महत्वाकांक्षा, प्रकृति और आत्मबोध एक-दूसरे से जुड़ते हुए दिखाई देते हैं। हर्ष की यात्रा के माध्यम से लेखक उस सवाल को सामने लाते हैं, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कहीं पीछे छूट जाता है, क्या सफलता का अर्थ केवल आगे बढ़ते रहना है, या कभी-कभी खुद को समझने के लिए रुकना भी जरूरी होता है?

वासु देसाई लेखन को केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि पाठक और उसके भीतर की दुनिया के बीच संवाद मानते हैं।

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